पालि-कोष्ठक ई-पत्रिका

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पालि कोष्ठक त्रैमासिक संस्कृत ई. पत्रिका का उद्येश्य पालि कोष्ठक को मंच प्रदान करना तथा उनकी प्रतिभा को पाठकों के सम्मुख लाना है। इससे संस्कृत के नूतन लेखकों, अध्येताओं, छात्रों में भाषा विकास के साथ-साथ सर्जनात्मकता विकसित होगी तथा अध्येताओं को संस्कृत विद्या की जीवन्तता, समसामयिक ज्ञानवर्द्धक तथा जनोपयोगी जानकारी मिल सकेगी । इस पत्रिका का उद्येश्य ऐसे समस्त ज्ञान सम्पदा को प्रकाश में लाना है, जो संस्कृत विद्या व भाषा के प्रसार-प्रचार में उपयोगी हो।

पत्रिका के विषयवस्तु

  • संस्कृत लघुकथा, कविता, गजल, गीत. एकांकी नाटक, आदि ।
  • संस्कृत भाषा के सम्वर्धन में प्रयुक्त नवाचारों, तदर्थ निर्मित योजनाओं पर वैचारिक निबन्ध।
  • संस्कृत की समसामयिक समस्या तथा उसके निदान पर विशेषज्ञ विद्वानों के आलेख।
  • नवीन मौलिक प्रकाशित पुस्तक का समीक्षात्मक परिचय।
  • संस्कृत के विशिष्ट विद्वानों, संस्कृत के प्रचार-प्रसार में संघर्षरत बुद्धिजीवियों के साक्षात्कार ।
  • संस्कृत की उन्नति में प्रयासरत संस्थाओं, संगठनों के क्रियाकलापों तथा उनके बारे में परिचय।
  • संस्कृत के पुरस्कार प्राप्त विद्वानों की जीवनी,संस्मरण ।
  • पर्यटन स्थल , यात्रावृतान्त, तीर्थ परिचय, संस्कृत से जुडी ऐतिहासिक घटना।
  • संस्थाओं,संगठनों द्वारा आयोजित संस्कृत, पालि, प्राकृत विषयक कार्यक्रमों की सूचना।
  • बालोपयोगी सामग्री,जो बच्चों में संस्कृत भाषा के विकास में सहायक हो।
  • जनोपयोगी विषयः- यथा ज्योतिष, कर्मकाण्ड, धर्मशास्त्र,आयुर्वेद।
  • पुरस्कार,पदभार ग्रहण, रोजगार, निधन आदि की सूचना।
  • अन्तर्जाल पर उपलब्ध संस्कृत विषयक सामग्री की जानकारी ।
  • प्रहेलिका आदि सहित अन्य मनोरंजक सामग्री ।
  • संस्कृत पुस्तकालयों से सम्बद्ध आलेख।
  • पाठकों द्वारा प्राप्त परिस्पन्द ।
  • यह एक त्रैमासिक पत्रिका होगी। यह प्रत्येक वर्ष के जनवरी, अप्रैल, जुलाई एवं अक्टूबर में प्रकाशित होगी।
  • लेख या रचनाएँ 1 पृष्ठ से 5 पृष्ठों के मध्य होना चाहिए।
  • पत्रिका में प्रकाशनार्थ अपनी मौलिक एवं अप्रकाशित रचना की एक टंकित word की soft copy तथा एक PDF प्रति Kruti Dev 010 फाण्ट में प्रेषित करें।
  • समस्त लेख, रचनाएँ या सूचना एतत्सम्बन्धी ई-मेल – nideshak@upsanskrit-nic.in पर अपना पूरा पता एवं स्वयं का फोटो, विषय से सम्बन्धित फोटो के साथ भेजना चाहिए।
  • लेखक स्वयं के ई-मेल द्वारा ही लेख भेजें।
  • निःशुल्क सदस्यता के लिए सदस्यता बटन पर जाकर अपना पूर्ण विवरण भी उपलब्ध कराना अपेक्षित होगा। अन्यथा प्रकाशन सम्बन्धी सूचनाओं से अवगत कराना सम्भव नहीं होगा।
  • 'पालि कोष्ठक' में 'कृति-परिचय' स्तम्भ के अन्तर्गत प्रकाशित पुस्तकों की समीक्षाएं भी प्रकाशित की जाती हैं, अत: लेखकों तथा प्रकाशकों से कृतियाँ आमन्त्रित हैं।
  • इस पत्रिका में प्रकाशित श्रेष्ठ सर्जना को वर्ष में एक बार चयन कर पुरस्कृत करने पर विचार किया जा सकता है।
  • प्रत्येक लेख पर स्वत्वाधिकार लेखकों एवं सम्पादकों का रहेगा । पत्रिका में प्रकाशित लेख से सम्पादक/प्रकाशक का सहमत होना आवश्यक नहीं होगा। तथ्यों की प्रामाणिकता एवं मौलिकता हेतु लेखक स्वयं उत्तरदायी होंगें।
  • लेखों या रचनाओं के प्रकाशनार्थ चयन सम्पादक एवं परामर्शदात्री समिति के विवेकाधीन होगा।
  • यह संस्कृत, हिन्दी भाषा में प्रकाशित होगी।
  • संस्कृत गद्य लेखन में क्लिष्ट समस्तपद एवं सन्धियों के प्रयोग न्यूनातिन्यून किये जायें।
  • नव प्रवेशियों द्वारा संस्कृत भाषा लेखन में स्खलन स्वभाविक है। विज्ञजनों के परिस्पन्द (fedback) के माध्यम से पत्र/ सुझाव सादर आमंत्रित हैं।
  • पालि कोष्ठक पत्रिका में प्रथम बार लेख प्रकाशन से पूर्व उपलब्ध कराये गये निर्धारित प्रारुप पर एतद्विषयक घोषणा पत्र देना अनिवार्य है कि पत्रिका में प्रकाशनार्थ प्रेषित मेरी मौलिक रचना है तथा किसी भी विवाद की स्थिति में केवल मैं स्वयं उत्तरदायी हुंगा/ हुंगी।
  • पत्रिका से सम्बन्धित समस्त न्यायिक परिवाद क्षेत्र लखनऊ होगा।

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